प्रेस विज्ञप्ति
ग्राम सेवा समिति ट्रस्ट के नामांतरण आवेदन खारिज
ट्रस्ट के जमीन के कथित फर्जी विनिमय कागज म तहसीलदार के कड़ा टिप्पणी, आपत्ति ला मानके नामांतरण आवेदन निरस्त
रायपुर। रायपुर शहर के प्रतिष्ठित अउ साल 1953 ले पंजीकृत बताए जावत ग्राम सेवा समिति ट्रस्ट के पंडरीतराई स्थित जमीन ला लेके चलत विवाद फेर एक बेर सामने आ गे हवय। ट्रस्ट के बेशकीमती जमीन के संबंध म पेश करे गे नामांतरण आवेदन ला तहसीलदार रायपुर ह निरस्त कर दे के बाद मामला म ट्रस्ट के संपत्ति के अधिकार, कागज के वैधानिकता अउ कथित रूप ले ट्रस्ट के नाव म करे गे लेन-देन ला लेके गंभीर सवाल खड़े हो गे हवय।
मामला के मुताबिक, पंडरी क्षेत्र म स्थित ट्रस्ट के जमीन के संबंध म अजय तिवारी अउ बबीता अग्रवाल के बीच एक विनिमय विलेख पंजीकृत कराय गे रिहिसे। एही विनिमय विलेख के आधार म बबीता अग्रवाल के कोती ले जमीन के नामांतरण बर तहसीलदार रायपुर के समक्ष आवेदन पेश करे गे रिहिसे। आवेदन के बाद अधिवक्ता अउ समाजसेवी महंत राम आशीष दास अउ ग्राम सेवा समिति ले जुड़े बुनकर मन के कोती ले आपत्ति पेश करे गिस अउ नामांतरण आवेदन ला निरस्त करे के मांग करे गिस।
आपत्तिकर्ता मन के कोती ले पेश करे गे दस्तावेज मन म मुख्य रूप ले ये सवाल उठाय गिस कि जेन व्यक्ति ह ट्रस्ट के संपत्ति ले संबंधित कागज ला बनाए हवय, ओला ट्रस्ट के संपत्ति के संबंध म अइसन निर्णय लेहे या कागज करे के वैधानिक अधिकार प्राप्त रिहिसे कि नहीं। आपत्ति म ये घलो कहे गिस कि अजय तिवारी ग्राम सेवा समिति के वैध ट्रस्टी नहीं रिहिन अउ एखर बाद घलो ट्रस्ट के संपत्ति के संबंध म ट्रस्टी के रूप म ओकर नाव दर्ज करा दे गिस।
रजिस्ट्रार अउ एसडीएम के अनुमति के मुद्दा

मामला म सबले महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु ट्रस्ट के संपत्ति के हस्तांतरण ले जुड़े अनुमति ला लेके सामने आइस। आपत्तिकर्ता मन के अनुसार, लोक न्यास के संपत्ति के विक्रय, दान, लीज अथवा विनिमय जइसे मामला म संबंधित वैधानिक प्रक्रिया अउ सक्षम प्राधिकारी के अनुमति आवश्यक होथे। ओमन के आरोप हवय कि संबंधित विनिमय विलेख के निष्पादन ले पहिले आवश्यक अनुमति प्राप्त नहीं करे गिस।
तहसीलदार के समक्ष पेश करे गे आपत्ति अउ दस्तावेज मन म विचार करे के बाद ये मुद्दा घलो सामने आइस कि यदि कागज निष्पादित करे वाला व्यक्ति ला ट्रस्ट के संपत्ति के संबंध म वैधानिक अधिकार ही प्राप्त नहीं रिहिस अउ आवश्यक अनुमति घलो नहीं ले गे रिहिस, त अइसन कागज के आधार म नामांतरण करना विधिसम्मत होही कि नहीं।
तहसीलदार ह आपत्ति स्वीकार करके आवेदन ला करिस निरस्त
प्रकरण म उपलब्ध दस्तावेज अउ आपत्ति मन म विचार करे के बाद तहसीलदार रायपुर ह बबीता अग्रवाल ह जोन नामांतरण आवेदन पेश करे रिहिस ओला निरस्त कर दिस। आदेश म आपत्तिकर्ता मन ह जोन प्रमुख बिंदु उठाय रिहिन ओला स्वीकार करे गिस अउ ट्रस्ट के संपत्ति ले संबंधित कागज के वैधानिकता म सवाल ला महत्वपूर्ण मान गिस।
ए निर्णय के बाद ट्रस्ट के पंडरीतराई स्थित जमीन के कथित विनिमय ला लेके चलत प्रक्रिया म फिलहाल रोक लग गे हवय। नामांतरण आवेदन खारिज होए ले ये घलो स्पष्ट हो गिस कि खाली पंजीकृत कागज के आधार म जमीन के नामांतरण अपनेच स्वीकार नहीं करे जावय, बल्कि संबंधित पक्ष के अधिकार अउ आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया के घलो जांच करे जा सकथे।
ट्रस्ट के अन्य संपत्ति ला लेके घलो उठत रिहिन सवाल
मामला ले जुड़े लोगन के आरोप हवय कि ग्राम सेवा समिति के अन्य संपत्ति ला लेके घलो पहिले विवाद सामने आ चुके हवय। विशेष रूप ले आमासिवनी क्षेत्र स्थित ट्रस्ट के जमीन के संबंध म घलो कथित अनियमितता अउ हस्तांतरण ला लेके सवाल उठाय गे हवय। हालाँकि ए आरोप मन के स्वतंत्र पुष्टि संबंधित सक्षम अभिलेख अउ न्यायिक/प्रशासनिक रिकॉर्ड ले किया जाना आवश्यक हवय।
आपत्तिकर्ता मन के कहना हवय कि साल 1953 ले अस्तित्व म बताए जावत ट्रस्ट के संपत्ति मन खाली कोनो व्यक्ति विशेष के निजी संपत्ति नहीं हवय, बल्कि ओकर उपयोग ट्रस्ट के घोषित उद्देश्य मन के अनुरूप होना चाही। एखर सेती ट्रस्ट के जमीन ले संबंधित हरेक लेन-देन म पारदर्शिता अउ निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के पालन आवश्यक हवय।
आगू घलो सामने आ सकथे दस्तावेज
तहसीलदार ह नामांतरण आवेदन निरस्त करे के बाद अब पूरा मामला म आगू के कानूनी प्रक्रिया म घलो नजर टिके हवय। संबंधित पक्ष आदेश के विरुद्ध सक्षम राजस्व अथवा न्यायिक मंच म अपन पक्ष रख सकथे। उहें पारा, ट्रस्ट के संपत्ति ले जुड़े पुराना दस्तावेज, ट्रस्ट के पंजीयन स्थिति, ट्रस्टी नियुक्ति संबंधी रिकॉर्ड अउ पहिले करे गे जमीन हस्तांतरण मन के वैधानिकता के जांच के मांग घलो उठ सकथे।
मामला म सबले अहम सवाल एहे हवय कि ट्रस्ट के संपत्ति ले संबंधित कागज काकर अधिकार ले निष्पादित करे गिस, संबंधित व्यक्ति ला ट्रस्टी के रूप म मान्यता प्राप्त रिहिसे कि नहीं अउ संपत्ति के विनिमय ले पहिले आवश्यक वैधानिक अनुमति ले गे रिहिसे कि नहीं। तहसीलदार ह नामांतरण आवेदन निरस्त करे के बाद अब ए सवाल मन के दस्तावेजी जवाब सामने आना महत्वपूर्ण मान जावत हवय।
