
राजधर्म
======
राजनीति कि एक शुचिता , धर्म होता है , पर राजनीति में जब दुराग्रह पूर्वाग्रह शामिल हो जाता है तो उत्पन्न होता है दुराशय और घृणा , ये अक्सर भय और डर और कर्तव्य की अपूर्णता से ग्रस्त होने पर या कोई भारी प्रलोभन या लालच दबाव के कारण होता है
प्रसंग ये कि , एक युवा प्रगतिशील किसान मेहनती ईमानदार व्यवसायी जिसको देख कभी नहीं एहसास हुआ कि वो पूर्व मुख्यमंत्री का पुत्र है , चूकी मैं उस युवा किसान को उसके बचपन से जानता हूँ भूपेश बघेल जी के पूरे मुख्यमंत्री काल में ना कोई सरकारी लाभ लिया और ना ही कोई हस्तक्षेप ,
आज उसका जन्मदिन है , भगवान शतायु दीर्घायु करे , पर उस बेचारे युवा पर सिर्फ इसलिय कार्यवाही कि वो पूर्व मुख्यमंत्री का पुत्र है , राजनीति शुचिता राजधर्म के विरुद्ध है अनुचित है निंदनीय है , और राजनीति के नेपथ्य में जाने कि गिरावट का कारण है , राजनीति में पक्ष – विपक्ष कि बड़ती दूरी और समन्वय का अभाव दर्शाती है और अनुभवहीनता भी
क्योंकि ये घटना लोगो में घृणा और निरंकुशता उन्माद पैदा करने वाली है और परिवार पत्नी बच्चे तो सभी के होते है
पहले राजनीति में राजधर्म का विशेष ध्यान रखा जाता था , 2018 कांग्रेस के शासन आने के पूर्व भूपेश बघेल के जमीन का भरी बारिश में सीमांकन करवाएगा , एक मंत्री कि साली फ़र्जी परीक्षा देती पकड़ाई और ना जाने कितने ग़ैर ज़िम्मेदार और भराष्ट कृत्य , भूपेश सरकार ने कार्यवाही की पर कभी किसी के पत्नी पुत्र पुत्री या दामाद को कभी निशाना नहीं बनाया गया और ना ही पूर्वाग्रह पूर्वक कार्यवाही
किसी के जन्मदिन कम से कम उसके और उसके परिवार के लिए विशेष दिन होता है और ऐसे दिन कार्यवाही दुर्भाग्य पूर्ण है वो भी एक ऐसे अपराधी के बयान के आधार पर जिस पर ख़ुद पुलिस ने कार्यवाही नहीं किया है और वो सशर्त जमानत पर है कि घूम घूम कर टारगेट किलिग बयान दे
चैतन्य बघेल ग़ैर राजनैतिक युवा है , उसके विरुद्ध कार्यवाही समाज को उदेलित करने वाली है ,
बिट्टू तुम तप कर कुंदन बन कर निखर कर निर्दोष साबित हो कर निकलोगे
भगवान और धर्म तुम्हारे साथ है l
